नैमिषारण्य यात्रा भाग-3

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महर्षि व्यास गद्दी

हनुमान गढ़ी से लगभग 01 km. और चक्रतीर्थ तथा माँ ललिता देवी मंदिर से लगभग 3 km. की दुरी पर जंगलो के बिच हरे भरे पदों से घिरा हुआ एक अति प्राचीन और महत्वपूर्ण स्थान है जिसका नाम व्यास गद्दी है | व्यास गद्दी वही स्थान है जहाँ महर्षि वेद व्यास रहते थे और यह वही स्थान है जहाँ पर बैठ कर उन्होंने 4 वेद 6 शास्त्र 18 पुराण श्रीमदभागवत गीता और सत्यनारायण कई व्रत कथा लिखी थी | अपने चार शिष्यों को सर्व प्रथम यहीं पर चरों वेदों का ज्ञान दिया था और नैमिषारण्य में 88000 ऋषियों को एक साथ सत्यनारायण जी की प्रथम कथा सुनाने वाले श्री सूत जी महाराज को भी 17 पुराण और 6 शास्त्र का ज्ञान भी वेद व्यास जी ने यहीं पर दिया था और अपने पुत्र श्री सुखदेव जी को श्रीमदभागवत पाठ और 18 पुराण का ज्ञान भी व्यास जी ने यहीं पर दिया था जिन्होंने पूर्व काल में राजा परीक्षित को प्रथम बार श्रीमदभागवत कथा सुनाई थी | वेद व्यास जी को श्री हरी विष्णु का अवतार मन जाता है|



मनु-शतरूपा आश्रम

व्यास गद्दी के बिल्कुल सामने स्थित है मनु-शतरूपा आश्रम | शतरूपा संसार की प्रथम स्त्री थी ऐसी हिंदू मान्यता है। इनका जन्म ब्रह्मा के वामांग से हुआ था तथा स्वायंभुव मनु की पत्नी थीं। सुखसागर के अनुसार सृष्टि की वृद्धि के लिये ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को दो भागों में बाँट लिया जिनके नाम 'का' और 'या' (काया) हुये। उन्हीं दो भागों में से एक से पुरुष तथा दूसरे से स्त्री की उत्पत्ति हुई। पुरुष का नाम स्वयंभुव मनु और स्त्री का नाम शतरूपा था। इन्हीं प्रथम पुरुष और प्रथम स्त्री की सन्तानों से संसार के समस्त जनों की उत्पत्ति हुई। मनु की सन्तान होने के कारण वे मानव कहलाये ।


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